Wednesday, 27 November 2019


                                         पागल औरत
यह औरत भी न, रोज़ सुबह- सुबह शुरू हो जाती है । सोने ही नहीं देती । खुद तो पागल है , दूसरों को भी पागल बनाकर छोड़ेगी । इसका तो कुछ करना पड़ेगा । सारा दिन बच्चे पर चिल्लाती रहती है । बाप तो है ही बेवड़ा , माँ भी पागल । न जाने बच्चे का क्या होगा । सारा दिन पढ़ो-पढ़ो का रट लगाए रहती है । यह मत करो , वह मत करो , बच्चे को एक मिनट के लिए भी अकेला नहीं छोडती है । देखना एक दिन बच्चा घर से भाग जाएगा ।
                                रश्मि को चुप कराते हुए शर्मा जी बोले –“ अरे रश्मि , छोड़ो न यार। पड़ोसी हैं  , हम कर भी क्या सकते हैं”। रश्मि बोली “ दरअसल मुझे उस बच्चे की फिक्र है । बेचारा कितने अच्छे अंकों से हर साल पास होता है । कक्षा में प्रथम आता है । फिर भी यह औरत न जाने क्यों खुश नहीं होती । खुद को तो एक अक्षर पढ़ना नहीं आता , चली है समाज सुधारने” । शर्मा जी बोले  – “ छोड़ो यार , उसे तो सब पागल बोलते हैं न , अब छोड़ो”।
                             नाश्ता करते हुए शर्मा जी ने यूँ ही रश्मि से पूछा – “ हमारे पड़ोस के विवेक को मैं पिछले दो दिनों से चौराहे में कुछ लफंगों के साथ घूमते देख रहा हूँ । उसकी माँ को अब गुस्सा नहीं आता ?
रश्मि कुछ देर चुप रही, फिर लंबी साँस लेते हुए बोली “ सिलाई कढ़ाई से जो थोड़े बहुत पैसे कमा लेती थी उसी से बच्चे के स्कूल की फीस चुका पाती थी । पिछले हफ्ते बेवड़ा पति उन्हीं पैसों को चुराकर भाग रहा था । दोनों में हाथापाई हो गई और उसकी माँ  वहीं गिर गई ।  सिर पर गहरी चोट लगने से उसकी वहीं पर मौत हो गई । अब बेवड़ा पति हवालात में बंद है । विवेक की दादी आकर  रह रही है उसके साथ। तुम एक हफ्ते के लिए बाहर गए थे इसीलिए मैंने तुम्हें नहीं बताया यह सब । अच्छा ही हुआ , रोज़-रोज़ की खिट-खिट अब विवेक को भी  नहीं सुनने को मिलेगा और हमारी सुबह की नींद भी खराब नहीं होगी “।
   शर्मा जी सुन्न रह गए । सोचने लगे कि काश विवेक की माँ हमेशा की तरह उसपर चिल्ला पाती तो उसका उज्ज्वल भविष्य इस प्रकार नष्ट न होता । 


                                         पागल औरत यह औरत भी न , रोज़ सुबह- सुबह शुरू हो जाती है । सोने ही नहीं देती । खुद तो पागल है , ...