पागल औरत
यह औरत भी न,
रोज़ सुबह- सुबह शुरू हो जाती है । सोने ही नहीं देती । खुद तो पागल है ,
दूसरों को भी पागल बनाकर छोड़ेगी । इसका तो कुछ करना पड़ेगा । सारा दिन बच्चे पर
चिल्लाती रहती है । बाप तो है ही बेवड़ा , माँ भी पागल । न जाने बच्चे का क्या होगा । सारा
दिन पढ़ो-पढ़ो का रट लगाए रहती है । यह मत करो , वह मत करो ,
बच्चे को एक मिनट के लिए भी अकेला नहीं छोडती है । देखना एक दिन बच्चा घर से भाग
जाएगा ।
रश्मि को चुप
कराते हुए शर्मा जी बोले –“ अरे रश्मि , छोड़ो न यार। पड़ोसी हैं , हम कर भी क्या सकते हैं”। रश्मि बोली –
“ दरअसल मुझे उस बच्चे की फिक्र है । बेचारा कितने अच्छे अंकों से हर साल पास होता
है । कक्षा में प्रथम आता है । फिर भी यह औरत न जाने क्यों खुश नहीं होती । खुद को
तो एक अक्षर पढ़ना नहीं आता , चली है समाज सुधारने” । शर्मा जी बोले – “ छोड़ो यार , उसे तो सब पागल बोलते हैं
न , अब छोड़ो”।
नाश्ता करते हुए शर्मा जी ने यूँ ही रश्मि से
पूछा – “ हमारे पड़ोस के विवेक को मैं पिछले दो दिनों से चौराहे में कुछ लफंगों के
साथ घूमते देख रहा हूँ । उसकी माँ को अब गुस्सा नहीं आता ?
रश्मि कुछ देर चुप रही,
फिर लंबी साँस लेते हुए बोली – “ सिलाई – कढ़ाई से जो थोड़े बहुत पैसे कमा लेती थी उसी से
बच्चे के स्कूल की फीस चुका पाती थी । पिछले हफ्ते बेवड़ा पति उन्हीं पैसों को
चुराकर भाग रहा था । दोनों में हाथापाई हो गई और उसकी माँ वहीं गिर गई ।
सिर पर गहरी चोट लगने से उसकी वहीं पर मौत हो गई । अब बेवड़ा पति हवालात में
बंद है । विवेक की दादी आकर रह रही है
उसके साथ। तुम एक हफ्ते के लिए बाहर गए थे इसीलिए मैंने तुम्हें नहीं बताया यह सब
। अच्छा ही हुआ , रोज़-रोज़ की खिट-खिट अब विवेक को भी नहीं सुनने को मिलेगा और हमारी सुबह की नींद भी
खराब नहीं होगी “।
शर्मा जी सुन्न रह गए । सोचने लगे कि काश
विवेक की माँ हमेशा की तरह उसपर चिल्ला पाती तो उसका उज्ज्वल भविष्य इस प्रकार
नष्ट न होता ।